हर इलाज की शुरुआत यहीं से होती है। डॉक्टर आपकी पूरी बात सुनते हैं, जाँच करते हैं, और फिर खानपान, दिनचर्या और औषधि पर सलाह देते हैं।
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प्रकृति परीक्षण
आपके शरीर की बनावट और स्वभाव (प्रकृति) को समझना, ताकि सलाह आपके हिसाब से हो।
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नाड़ी परीक्षा
नाड़ी देखकर शरीर की स्थिति समझने की पारंपरिक विधि।
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पूरी जानकारी और जाँच
तकलीफ़ कब से है, पहले क्या इलाज हुआ, और ज़रूरी शारीरिक जाँच।
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पथ्य-अपथ्य
क्या खाएँ और क्या कम करें या टालें, आपकी तकलीफ़ और प्रकृति के हिसाब से।
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दिनचर्या और ऋतुचर्या
रोज़ की दिनचर्या और मौसम के हिसाब से रहन-सहन पर सलाह।
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शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधियाँ
ज़रूरत हो तो शास्त्रीय औषधियाँ और जड़ी-बूटियों से बने योग, डॉक्टर के बताए अनुसार।